Edited By: Amrit Samuel, District Reporter, Bijnor 16/07/2026
बिजनौर: शहर की सड़कें इन दिनों विकास की रफ्तार नहीं, बल्कि जाम की बेड़ियों में जकड़ी हुई हैं। बिजनौर शहर के मुख्य मार्गों पर हर दिन लगने वाला भीषण जाम आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों, स्कूल जाने वाले बच्चे या फिर अस्पताल जा रहे मरीज—हर किसी को इस अव्यवस्था की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
जाम: एक अंतहीन सिलसिला
शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि महज 10 मिनट का रास्ता तय करने में लोगों को घंटों का समय लग रहा है। चिलचिलाती धूप और उमस में फंसे वाहन चालक प्रशासन को कोसते नजर आते हैं, लेकिन सिस्टम है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा।आम जनता का सीधा आरोप ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि व्यस्त चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी न के बराबर है। जहाँ पुलिसकर्मी तैनात भी होते हैं, वे यातायात सुचारू करने के बजाय अपनी ड्यूटी पूरी करने की औपचारिकता निभाते दिखते हैं। भारी वाहनों का शहर के अंदर बेरोकटोक प्रवेश, सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण और मनमाने ढंग से खड़े किए गए ई-रिक्शा जाम की मुख्य वजह हैं, जिन्हें नियंत्रित करने में ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
फिलहाल, बिजनौर की जनता शासन-प्रशासन के किसी ठोस कदम का इंतजार कर रही है, ताकि वे बिना किसी डर और देरी के अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।



