Edited By: Amrit Samuel, District Reporter, Bijnor
बिजनौर 30/07/2026। लगभग 14 वर्ष पुराने बहुचर्चित प्रबल हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत के निर्णय के साथ लंबे समय से चले आ रहे इस मामले का महत्वपूर्ण कानूनी निष्कर्ष सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 में बिजनौर स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आपसी विवाद के दौरान प्रबल के साथ कथित रूप से गंभीर मारपीट की गई, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। आरोप है कि घटना के बाद शव को गंगा नदी में फेंक दिया गया था। लगभग एक माह बाद हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा से शव बरामद हुआ, जिसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।
इस मामले में अदालत ने संजय गुप्ता, एडवोकेट विनय अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता तथा आशीष उर्फ आशु को दोषी करार दिया। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
बताया जाता है कि प्रबल की मृत्यु के कुछ माह बाद उसके माता-पिता का भी निधन हो गया था। इसके बाद उसकी बड़ी बहन ने लगातार न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी रखी। लगभग 14 वर्षों तक चले इस मुकदमे के बाद अदालत के फैसले को परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मामले के संबंध में यह भी आरोप लगाए जाते रहे कि जांच के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे तथा कुछ आरोपियों को लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से समय-समय पर अलग-अलग पक्ष सामने आते रहे हैं। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं सुनवाई के आधार पर अपना निर्णय सुनाया।
गौरतलब है कि दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनका स्थानीय स्तर पर सामाजिक एवं सार्वजनिक संस्थाओं से संबंध रहा है। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
यह निर्णय लंबे समय तक चले आपराधिक मुकदमे में न्यायिक प्रक्रिया की महत्ता को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है, चाहे मुकदमे के निस्तारण में लंबा समय ही क्यों न लगे।




