Edited By: Rohit Kumar Dongre, District Reporter: Balaghat, Madhya Pradesh
कनेरी (हेट्टी) में उमड़ा आदिवासी समाज का जनसैलाब, पारंपरिक वेशभूषा में निकली रैली ने बिखेरी संस्कृति की छटा
किरनापुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज 9 अगस्त 2026 को किरनापुर तहसील के ग्राम कनेरी (हेट्टी) में आदिवासी समाज ने एकजुटता और उत्साह के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर समाजजनों की भीड़ जुटने लगी। घने बादलों के बीच पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण एवं प्रस्तावित सामुदायिक भवन के भूमिपूजन के साथ हुई। इसके बाद समाजजनों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में रैली निकाली गई। रैली के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और एकता की झलक देखने को मिली।
दोपहर में आयोजित मुख्य समारोह में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वागत, सम्मान समारोह एवं संबोधन हुआ। कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर वर्ष 2026 की वार्षिक परीक्षा में कक्षा 10वीं एवं 12वीं में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के सम्मान से समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी गया।
कार्यक्रम में समाज की संस्कृति, भाषा, परंपरा और इतिहास के संरक्षण के साथ शिक्षा, सामाजिक एकता और समाज के विकास को लेकर भी विचार रखे गए।
इस आयोजन में मध्यप्रदेश सर्व आदिवासी समाज संगठन किरनापुर, आदिवासी अधिकारी कर्मचारी संघ किरनापुर, मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद किरनापुर, हेट्टी बावड़ी समिति हेट्टी एवं गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन किरनापुर सहित विभिन्न संगठनों की सहभागिता रही।
बादलों ने भी नहीं रोका उत्साह
सुबह से आसमान में घने बादल छाए रहे, लेकिन मौसम भी समाज के उत्साह को कम नहीं कर सका। पारंपरिक परिधान में पहुंचे महिला-पुरुष, युवा और बच्चे पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। रैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान आदिवासी समाज की एकता और गौरव की तस्वीर साफ नजर आई।
किरनापुर में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह ने एक बार फिर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की मजबूत झलक पेश की।


