Edited by: Amrit Samuel, District Reporter Bijnor
बिजनौर। कहते हैं कि सरकारें गरीबों को छत और इंसाफ देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसा ही झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार सालों से बेघर होकर सड़कों पर भटकने को मजबूर है। जिम्मेदार अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर इस परिवार की चप्पलें घिस चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
अंधी पत्नी और मासूम बच्चों को लेकर भटक रहे महेंद्र सिंह
पूरा मामला बिजनौर निवासी महेंद्र सिंह का है। महेंद्र सिंह का परिवार आज एक-एक रोटी और सिर छुपाने के लिए छत को मोहताज है। बेबसी का आलम यह है कि महेंद्र सिंह अपनी दृष्टिहीन (अंधी) पत्नी और छोटे-छोटे मासूम बच्चों को लेकर पूरे-पूरे दिन तपती धूप और कड़कड़ाती ठंड में इंसाफ की आस में भटकते रहते हैं। एक तरफ लाचार और बीमार पत्नी की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ इन मासूम बच्चों का अंधकार में डूबता भविष्य।
अधिकारियों के चक्कर काटे, पर मिली सिर्फ ‘तारीख’
पीड़ित महेंद्र सिंह का आरोप है कि वे अपनी इस बदहाली और बेघर होने की समस्या को लेकर जिले के तमाम आला अधिकारियों और प्रशासनिक चौखटों पर माथा टेक चुके हैं। कई बार लिखित शिकायतें और प्रार्थना पत्र भी दिए गए। हर बार सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाकर उन्हें टाल दिया जाता है, लेकिन धरातल पर किसी भी प्रकार की सहायता या सुनवाई नहीं की जा रही है।
“हम सालों से बेघर हैं। बच्चों को लेकर कहाँ जाएँ? अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं, लेकिन कोई हमारी सुध लेने वाला नहीं है। क्या गरीबों के लिए कोई कानून या योजना नहीं है?” — महेंद्र सिंह (पीड़ित)
सरकारी योजनाओं पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
एक तरफ जहाँ सरकार ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत हर गरीब को पक्का मकान देने का दम भरती है, वहीं महेंद्र सिंह जैसे अत्यंत जरूरतमंद परिवार का इस तरह सड़कों पर होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। आखिर क्यों एक ऐसे परिवार को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसकी पत्नी देख नहीं सकती और बच्चे बेहद छोटे हैं?
इंसाफ और आशियाने की गुहार
यह परिवार पूरी तरह से बेघर हो चुका है और इस वक्त इन्हें तुरंत एक सुरक्षित आशियाने (घर) और सरकारी मदद की सख्त जरूरत है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद बिजनौर जिला प्रशासन की नींद टूटती है या यह बेबस परिवार यूँ ही सिस्टम की बेरुखी का शिकार होकर सड़कों पर भटकने को मजबूर रहेगा।
– ब्यूरो रिपोर्ट, बिजनौर


